Delhi Assembly Elections result how bjp mohan singh bisht won Mustafabad seat muslim constituency AAP Congress AIMIM Lose  

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Delhi Assembly Elections result: दिल्ली में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान हुए थे. परिणामों पर नजर डाली जाए तो आम आदमी पार्टी हार रही है और भारतीय जनता पार्टी सत्ता में वापसी करती दिख रही है, लेकिन इन सब के बीच सबसे ज्यादा किसी विधानसभा सीट की चर्चा है तो वह है मुस्तफाबाद. भारतीय जनता पार्टी ने मुस्तफाबाद से मोहन सिंह बिष्ट को टिकट दिया था, जो 30 हजार वोटों से आगे हैं. वैसे तो इसके पहले मोहन सिंह बिष्ट करावल नगर सीट से विधायक थे, लेकिन चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने उनकी तैनाती मुस्तफाबाद में की थी. 

मुस्तफाबाद विधानसभा सीट के समीकरण की बात की जाए तो यह सीट दिल्ली के टॉप 5 मुस्लिम इलाकों में आती है. यहां पर मुसलमानों की आबादी करीब 40 फीसदी है. इसके अलावा यहां पर ठाकुर और दलित मतदाता भी है. यहां पर ठाकुर करीब 12 फीसदी है तो वहीं दलित 10 फीसदी के आसपास. यानी कि इस विधानसभा सीट पर 40 फीसदी मुसलमान और 60 फीसदी हिंदू मतदाता है. 

कैसे भाजपा ने लहराया जीत का परचम?

सबसे बड़ी बात यह है कि मुस्लिम इलाके में भारतीय जनता पार्टी ने कैसे जीत दर्ज की, यह भी समझना जरूरी है. वैसे तो इस सीट पर जगदीश प्रधान प्रबल दावेदार थे, लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा ने यहां से मोहन सिंह बिष्ट को चुनावी टिकट दे दिया. चुनावी रणनीति में भाजपा की ओर से सीटों की अदला बदली की गई थी, जैसे मोहन सिंह बिष्ट करावल नगर से विधायक थे, जिनको मुस्तफाबाद से टिकट दिया गया था तो वहीं हिंदू नेता कपिल मिश्रा को करावल नगर से टिकट दिया गया था. सामान्य और जमीनी नेता के रूप में काम करने वाले मोहन सिंह बिष्ट को इसका फायदा चुनाव में मिला. 

दिल्ली दंगे के आरोपी को भी मिला था टिकट

इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने हसन अहमद के बेटे आदिल अहमद को टिकट दिया था तो वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यहां से ताहिर हुसैन को मैदान में उतार दिया. ताहिर हुसैन दिल्ली दंगे के आरोपी हैं और चुनावी प्रचार के लिए इजाजत लेने वह सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे. इसी पर ताहिर हुसैन के मैदान में उतरने के बाद पूरा चुनाव हिंदू वर्सेस मुस्लिम का हो गया था. 

भाजपा ने किया था डोर टू डोर कैंपेन

इस सीट से पांच मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जिसका बड़ा खामियाजा आम आदमी पार्टी को झेलना पड़ा. कांग्रेस के अली मेहदी चुनाव में चौथे स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने भी खूब मुसलमान के वोट काटे. भाजपा की जीत की एक वजह यह भी थी कि यहां पर पार्टी ने डोर टू डोर कैंपेन पर फोकस किया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मोर्चा संभाला तो वहीं मोहन सिंह बीच की जमीनी पकड़ ने भाजपा को इस मुस्लिम बहुल सीट पर जीत दिलाई. 

हाजी यूनुस ने जगदीश प्रधान को हराया था

मुस्तफाबाद सीट पर आपको नुकसान कुछ इस तरह हुआ की 2020 में यहां से जगदीश प्रधान को हाजी यूनुस ने उसने शिकस्त दी थी. इस बार AAP ने हाजी यूनुस की जगह आदिल को टिकट दे दिया, जो हिंदू वोटरों में सेंधमारी करने में असफल रहे और यही वजह थी कि यहां आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

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